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Badrinath Temple

Badrinath Temple

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Sharwan (श्रवन), on July 20, 2010, said:

बद्रीनाथ धाम हिमालय पर्वत की श्रेणी पर नर और नारायण पर्वतों के बीच अलकनंदा नदी के दक्षिण किनारे पर स्थित है। शास्त्रों में इसे विशालपुरी भी कहा गया । यह वैष्णव धाम है। अर्थात् यहां भगवान विष्णु की पूजा होती है । भारत की उत्तर दिशा में हिमालय पर स्थित हिंदुओं के सबसे प्राचीन तीर्थों में एक है। बद्रीनाथ का मंदिर समुद्र तट से लगभग ३५८३ मीटर की ऊंचाई पर है। पौराणिक मान्यताओं में बद्रीनाथ की स्थापना सतयुग में मानी जाती है । वेदों में भी बद्रीकाश्रम का वर्णन आया है । मंदिर में वर्तमान में स्थापित भगवान विष्णु की मूर्ति को आठवीं सदी में आदिगुरु शंकराचार्य ने नारदकुंड से निकालकर तप्तकुंड के पास गरुड़ गुफा में बद्रीविशाल के रूप में प्रतिष्ठित किया था। इसके बाद मंदिर का प्रशासन टेहरी गढ़वाल के महाराजा के पास आया । उनके द्वारा मंदिर का पुनर्निर्माण करवाया । मंदिर के मुख्य द्वार पर सुंदर चित्रकारी है । इसे सिंहद्वार कहते हैं । मंदिर के गुम्बज पर होल्कर रानी अहिल्याबाई द्वारा भेंट किया गया सोने का कलश आज भी स्थित है । बद्रीनाथ मंदिर में चार भुजाओं की काले पाषाण की बहुत छोटी मूर्ति है। भगवान पद्मासन की स्थिति में हैं । उनके मस्तक पर हीरा लगा है। मुकुट स्वर्ण मंडित है। इस मूर्ति के आस-पास नर-नारायण, उद्धवजी, कुबेर और नारदजी की मूर्ति है। मंदिर के समीप अलकनंदा के तट पर तप्त कुंड है, जिसका जल बहुत गरम होता है । महत्व :- बद्रीनाथ में भगवान विष्णु का तीर्थ होने से इसका महत्व वैकुंठ की तरह माना जाता है। यहां वेदों का संपादन करने वाले वेदव्यास मुनि का आश्रम था । यहां से कुछ दूर स्थित माना गांव में गणेश गुफा एवं व्यास गुफा है । ऐसी मान्यता है कि यहीं सरस्वती नदी के तट पर वेद व्यास ने महाभारत एवं श्रीमद्भागवत की रचना की । यह केशव प्रयाग के नाम से जाना जाता है । नारद मुनि नेभी यहां तपस्या की थी, जिससे यह क्षेत्र शारदा क्षेत्र के नाम से भी जाना जाता है । भगवान कृष्ण के मित्र उद्धव भी यहां तपस्या के लिए आए। बद्रीनाथ के पास ही अन्य धार्मिक एवं दर्शनीय स्थान है- जिनमें नारद कुंड, पंच शिला, वसुधारा, ब्रह्मकपाल, सोमतीर्थ, माता मूर्ति, शेष नेत्र, चरण पादुका, अलकापुरी, पंचतीर्थ व गंगा संगम आदि प्रमुख हैं। बद्रीनाथ तीर्थ के लगभग ५ किमी आगे भारत का अंतिम गांव माना या मणिभद्रपुर स्थित है । इसके बाद तिब्बत-चीन की सीमा है। अत: इस तीर्थ का सामरिक महत्व भी है।

कथा बद्रीनाथ क्षेत्र को अनादि क्षेत्र कहा जाता है । पौराणिक कथा है कि भगवान विष्णु का निवास क्षीरसागर में माना जाता है । जहां वह शेष शैय्या पर लेटे रहते हैं । जहां देवी लक्ष्मी उनके पैर दबाती हैं । एक बार इस पर ऋषि नारद के टिप्पणी करने पर भगवान विष्णु का मन आहत हुआ । इसके बाद भगवान विष्णु ने देवी लक्ष्मी को नागकन्या के यहां भेज दिया और स्वयं हिमालय पर तपस्या करने के लिए चले गए । हिमालय में भगवान विष्णु बैर अर्थात् बदरी को खाते रहे, और तपस्या करते रहे । इधर नागकन्याओं के यहां से देवी लक्ष्मी लौटी और क्षीरसागर में भगवान विष्णु को न पाकर वह हिमालय में आई । वहां देवी लक्ष्मी ने भगवान विष्णु को बैर या बद्री के जंगलों में तपस्या करते देखा । तब उन्होंने भगवान को बद्रीनाथ अर्थात् बैरों के वन के बीच तपस्या में लीन स्वामी, नाम से पुकारा । तब से ही इस क्षेत्र का नाम बद्रीनाथ हुआ।

पहुंच के संसाधनबद्रीनाथ जाने का मुख्य मार्ग ऋषिकेश से है। ऋषिकेश से बद्रीनाथ की दूरी २९५ किमी है। ऋषिकेश के आस-पास बस सेवा व हवाई सेवाएं उपलब्ध हैं। ऋषिकेश से बद्रीनाथ की यात्रा डेढ़ दिन की है। किंतु पहले केदारनाथ यात्रा पर जाने वाले तीर्थयात्री रुद्रप्रयाग वापस लौटें और फिर बद्रीनाथ जाएं।

यात्रा का समयमंदिर के कपाट नवंबर के दूसरे या तीसरे सप्ताह में बंद होते हैं । मान्यता है कि इस अवधि में भगवान योग ध्यान मुद्रा में रहते हैं और उनकी पूजा देवता करते हैं। बर्फ गिरने के कारण भी बद्रीनाथ धाम सर्दी में छह महीने बंद रहता है। नवंबर से मई माह के बीच भी यहां बेहद सर्दी होती है। मंदिर के पट अप्रैल के अंतिम या मई के प्रथम सप्ताह में खुलते हैं। मंदिर खुलने के दिन अखंड ज्योति के दर्शन का बहुत महत्व है । सलाह - यह पहाड़ी यात्रा है । ऋषिकेश से बद्रीनाथ की यात्रा के रास्ते में खान-पान, ठहरने का समुचित प्रबंध है । लेकिन पानी उबालकर पीना चाहिए। बद्रीनाथ मार्ग में आस-पास बर्फ चट्टानें खिसकना आम बात है। इसलिए प्राकृतिक संकट के प्रति सावधान रहना आवश्यक है । कार या अन्य निजी वाहन से जाते समय पहाड़ी क्षेत्र में वाहन की गति धीमी रखें।

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bankavatrs, on September 11, 2011, said:

Excellent composition. FAV 1 & LIKE 2

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Photo taken in Badrinath, Uttarakhand, India

 

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  • Uploaded on October 24, 2008
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    by atarax
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    • Camera: DSC Digital Camera
    • Taken on 2007/10/12 10:10:15
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    • Focal Length: 5.80mm
    • F/Stop: f/4.800
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